विपक्ष ने ‘नारी शक्ति वन्दन अधिनियम’ ख़ारिज कर अपनी महिला-विरोधी मानसिकता को किया बेनकाब: मनजिंदर सिंह सिरसा
अमृतसर, 20 अप्रैल 2026 (अभिनंदन सिंह)
बीजेपी दिल्ली की रेखा गुट सरकार के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की NDA सरकार का लोकसभा में ख़ारिज हुए ‘नारी शक्ति वन्दन अधिनियम’ पर बोलते हुए कहा कि यह भारत की आधी आबादी, जो कि महिलाओं की है, के साथ के साथ सीधा विश्वासघात है। आज भाजपा जिलाध्यक्ष हरविंदर सिंह संधू की अध्यक्षता में आयोजित पत्रकारवार्ता में उन्होंने कहा कि इससे कांग्रेस सहित सभी विपक्षी राजनितिक दलों की महिला-विरोधी मानसिकता को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। केंद्र की मोदी सरकार ने इन विधेयकों को भारत के लोकतंत्र को मज़बूत करने और ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के मूल संवैधानिक सिद्धांत को लागू करने के उद्देश्य से पेश किया था।
मनजिंदर सींह सिरसा ने कहा कि ऐसे समय में जब पूरे देश में महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे बढ़ रही हैं, यह बेहद निराशाजनक है कि संसद में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, TMC और DMK आदि राजनितिक दलों ने, जो देश के करोड़ों नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती है, ने इतने महत्वपूर्ण सुधार को खारिज कर दिया है। विपक्षी दलों द्वारा इस विधेयक को खारिज करके भारत की महिलाओं को साफ़ संदेश दिया है कि उनकी महिलाओं के बारे में क्या सोच है? इस कानून का विरोध करके, विपक्ष ने समावेशी प्रतिनिधित्व के लिए एक लोकतांत्रिक सुधार को खारिज कर दिया है। इन दलों ने न केवल संवैधानिक संशोधनों या परिसीमन से संबंधित विधेयकों का विरोध किया है; बल्कि उन्होंने भारत की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों की पीठ में छुरा घोंपा है।
सिरसा ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो यह महिलाओं को 2029 के आम चुनावों से ही लोकसभा में 33% आरक्षण प्राप्त करने में सक्षम बना देता, जो विपक्ष को हजम नहीं हुआ। इसका विरोध करके विपक्षी दलों ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़े कदम में बाधा डाली है। यह ऐसे समय में हुआ है जब लाखों महिलाएं गांवों में पंचायत स्तर पर सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रही हैं, निर्णय ले रही हैं और अब संसद तथा राज्य विधानसभाओं में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इस सुधार को रोककर, विपक्षी दल राष्ट्रीय निर्णय-निर्माण में उनकी उचित भागीदारी की राह में रोड़ा अटकाया है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 1970 के दशक में भारत की आबादी लगभग 55 करोड़ थी, जो आज बढ़कर *1.4 अरब* के आस-पास हो गई है, जिससे परिसीमन एक ज़रूरी संवैधानिक ज़रूरत बन गया है। संसद में पेश परिसीमन का ढाँचा यह सुनिश्चित करता है कि हर राज्य के लिए सीटों में 50% की बढ़ोतरी होगी। इस प्रक्रिया से संघीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और संसद में ज़्यादा प्रतिनिधित्व भी मिल पाएगा।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि विपक्ष, जो महिला-विरोधी, सुधार-विरोधी और विकास-विरोधी है, ने यह भ्रामक अफ़वाह फैलाई कि इस बिल के कारण परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। असल में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल का कुल हिस्सा 23.76 प्रतिशत से थोड़ा बढ़कर 23.87 प्रतिशत हो जाता, जिससे सीटों की संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाती। सभी राज्यों की सीटों में बराबर 50% की बढ़ोतरी होगी। दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं आती। साथ ही इस बिल से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व में भी आनुपातिक बढ़ोतरी होती, जिससे संसद में समावेशिता और मज़बूत होती।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि बीजेपी दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार दिल्ली की उन महिलाओं को सम्मान और गरिमा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसे AAP सरकार के शासन में छीन लिया गया था। रेखा गुप्ता सरकार द्वारा ‘दिल्ली लखपति बेटी योजना’, ‘सहेली स्मार्ट कार्ड’, ‘महिला समृद्धि योजना’ और ‘महिला हाट’ जैसी योजनाएँ आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और सशक्तिकरण पर केंद्रित महिला-नेतृत्व वाले विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है। केंद्र की मोदी सरकार महिलाओं को उनका उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने और संघीय संतुलन को मज़बूत करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। मोदी सरकार पीछे नहीं हटेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, हम राष्ट्रीय हित में नए संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहेंगे।
इस अवसर पर रमा महाजन, मीनू सहगल, मंजीत कौर थिंद, एकता वोहरा, अलका शर्मा, पार्षद श्रुति विज, पार्षद कृति अरोड़ा, पार्षद रमा मेहता, डॉली भाटिया, मोनिका श्रीधर, मनदीप कौर, जीत कौर आदि भी उपस्थित थी।



