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गौसेवक पंडित अवन पाराशर जी महाराज जी की प्रेरणा से संगत ने सड़क वाले गौवंश की सेवा का संकल्प लिया

अमृतसर,16 जून 2026 (सुखबीर सिंह)
पुरुषोत्तम मास की पावन सोमवती अमावस्या के अवसर पर अजय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दो दिवसीय विशाल गोकथा का भव्य आयोजन किया गया। इस शुभ अवसर पर सनातन धर्म सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवान श्री कृष्ण जी राधा रानी जी के परम भक्त
सुप्रसिद्ध गोकथा वाचक गौसेवक पंडित अवन पाराशर जी महाराज द्वारा “गौकथा में 33 कोटि देव दर्शन” विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल की निर्देशिका निर्मला सूरी ने की वह इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सनातन धर्म सुरक्षा परिषद की अमृतसर महानगर की अध्यक्ष एडवोकेट शिखा खरबंदा रही।
प्रसिद्ध गौ संरक्षण प्रचारक गौसेवक पंडित अवन पाराशर जी महाराज द्वारा गौमाता की महिमा एवं वर्तमान समय में गौ संरक्षण की आवश्यकता विषय पर एक प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
जिसमें विद्यालय प्रबंधन, अध्यापकगण, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।
अपने उद्बोधन में गौसेवक पंडित अवन पाराशर जी महाराज ने शास्त्रों में वर्णित गौमाता के दिव्य स्वरूप का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि
गौमाता कोई साधारण नहीं, बल्कि उनका शरीर चलता-फिरता देवालय है। गौमाता के शरीर में 33 कोटि अर्थात 33 प्रकार के देवी-देवता निवास करते हैं।
गौमाता में 8 वसु सींगों की जड़ में,
11 रुद्र शरीर में, 12 आदित्य पीठ पर,
2 अश्विनी कुमार गर्दन में व मस्तिक में।
नंदी महाराज भगवान शिव के वाहन व धर्म के प्रतीक।
उन्होंने कहा, “जिस गाय की हम पूजा करते हैं, उसी गाय का बछड़ा बड़ा होकर नंदी महाराज बनता है।
आज गौमाता के साथ नंदी महाराज की भी दुर्दशा हो रही है।”
पाराशर महाराज जी ने संगत को झकझोरते हुए कहा कि आज लगभग 75% गौवंश सड़कों पर भूखे, प्यासे, बीमार, जख्मी व शरण के अभाव में बेहद करुणामय व असहाय अवस्था में जीवन बिता रहे हैं।
कूड़े के ढेर में बासी उरली लगा खाना खाते खाते प्लास्टिक-पॉलीथिन , कांच, ब्लेड , जंग लगे लोहे , कील , रबड़ से ज़ख्मी और बीमार हो असमय प्राण त्यागने को मजबूर हैं। गर्मी में पानी न मिलने से तड़प-तड़प कर प्राण त्याग देते हैं।
सड़क दुर्घटनाओं में सींग, पैर टूट जाते हैं। लंपी, मुंह-खुर रोग से कोई इलाज नहीं मिलता।
सड़क वाले गौमाता जी नंदी महाराज जी को न गौशाला, न छाया मिलती हैं। सर्दी-गर्मी-बरसात में खुले आसमान के नीचे बहुत विषमता में जीवन बिताना पड़ता हैं। “जिस गौमाता के गोबर से घर को , यज्ञ स्थान को शुद्ध करने के लिए लीपा जाता था, आज वही गाय कचरा खा रही है। और उनके नाम पर गलियों में साइकिल और मोटरसाइकिल पर अनजान लोग जिनका ना मोबाइल नंबर है जिनके पास ना आधार कार्ड है और उनके वहां के आगे नंबर प्लेट कोई और और पीछे नंबर प्लेट कोई और है वह सड़क वाले गौ माता जी के नाम पर प्रतिदिन कई क्विंटल है रोटियां इकट्ठी करके 6500 से 7000 रुपए में बेचकर उसे राशि को समाज विरोधी गतिविधियों में लगाते हैं हम सबको चाहिए कि इसे उनके मोबाइल नंबर और आधार कार्ड मांगे तथा उनके गोवंश की फोटो मांगे अगर यह अपनी पहचान बताने में असफल होते हैं तो तुरंत 112 नंबर पर फोन करके उनकी फोटो खींचकर पुलिस में रिपोर्ट करें। यह हमारे समाज के लिए झकझोरने की बात है कि ना हमारे गौमाता जी को उनका कानूनी हक अर्थात काऊ सेस मिल रहा है और उनके नाम पर कई क्विंटल रोटियों की लूट अलग से हो रही है।”
गौसेवक पंडित अवन पाराशर जी महाराज ने बताया कि अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास में किया गया दान-पुण्य हजारों गुना फल देता है। इस मास में गौसेवा करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। सोमवती अमावस्या पर गौसेवा करने से पितरों को भी शांति मिलती है।
गौसेवक पं. अवन पाराशर जी महाराज ने इस अवसर पर सबको संदेश दिया कि
“33 कोटि देवता जिन गौमाता में बसते हैं, जिनके लिए सारा समाज 2016 से 12 बिलों के माध्यम से प्रतिदिन करोड़ों रुपया और अभी तक खरबों रुपये का काऊ सेस दे चुका हैं वह हमारे पूजनीय गौमाता जी नंदी महाराज जी हमारे जीवन काल में हमारे बोलने सुनने और देखने की शक्ति होने के बाद भी आज सड़क पर भूख प्यास बीमारी ज़ख़्मों के दर्द से कहराती हुए आस्याह जीवन जीने को मजबूर हैं।
हमें सभी मंदिर कमेटियों धार्मिक संस्थाओं सामाजिक संस्थाओं तथा लंगर कमेटियों से मिलकर आग्रह करना चाहिए कि वह सड़क वाले गौ माता जी नंदी महाराज जी के लिए हरे चारे स्वच्छ जल अच्छा चोकर और शक्कर का लंगर लगाए।
हमने मंदिरों में गौमाता के स्वरूप को तो सजा दिया, पर चलती-फिरती गौमाता जी नंदी महाराज जी को भूख प्यास बीमारी और जख्मों के दर्द से करने के लिए मजबूर कर दिया है।
याद रखना, जिस दिन गौमाता सुखी होगी, उस दिन भारत सुखी होगा। गौमाता केवल दूध देने वाली मशीन नहीं, हमारी संस्कृति की रीढ़ है। नंदी महाराज धर्म के प्रतीक हैं। इनकी रक्षा करना हर सनातनी का धर्म है।”
गौसेवक पंडित अवन पाराशर जी महाराज ने शास्त्रों के प्रमाण सहित बताया कि उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौमाता धर्म, संस्कृति, स्वास्थ्य, समृद्धि एवं आध्यात्मिक चेतना की आधारशिला हैं।
गौसेवा को सनातन धर्म में सर्वोच्च पुण्य कार्यों में स्थान दिया गया है।
गौमाता कोई नोट नहीं मांगती, गौमाता सिर्फ एक रोटी मांगती है।” आइए, पुरुषोत्तम मास के इस पावन समय में संकल्प लें कि हमारे क्षेत्र में कोई भी गौमाता-नंदी महाराज भूखा-प्यासा नहीं सोएगा और अपने परिचितों को प्रेरित करेंगे कि वह अपने संपर्क वाले चुने हुए पक्ष और विपक्ष के नेताओं और अधिकारियों से पूछे कि 2016 से काऊ सेस देने पर भी 75% गोवंश सड़क पर क्यों है और सड़क वाले गौवंश को गौशाला कब मिलेगी ???
गोकथा में संगत को जागृत करने हेतु 5 संकल्प दिलाए गए
1 घर में बनी पहली रोटी घी लगाकर गौमाता/नंदी महाराज को अपने हाथ से खिलाएं।
2 गर्मी में घर के बाहर गौवंश के लिए पानी का टब भरकर रखें।
3 सड़क पर कचरा न फेंके। प्लास्टिक गाय की मौत का कारण है।
4 बीमार/जख्मी गाय-नंदी दिखे तो तुरंत नजदीकी गौशाला को सूचित करें।
5 अपना जन्मदिन गौशाला में मनाएं। केक की जगह गाय को हरा चारा खिलाएं।
प्रिंसिपल श्री राजेश शर्मा ने घोषणा की कि अजय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सभी विद्यार्थी अब अपने घरों में पहली रोटी गौग्रास के लिए निकालेंगे। स्कूल में एकत्र रोटियाँ प्रतिदिन सड़क वाले गौमाता जी नंदी महाराज जी को अथवा नजदीकी गौशाला को भेजी जाएंगी। साथ ही प्रत्येक कक्षा में “गौसेवा मॉनिटर” नियुक्त किया जाएगा।
जय गौमाता जय गोपाल व
“गौ बचेगी तो देश बचेगा, गौ हंसेगी तो देश हंसेगा” के जयकारों के साथ सारी संगत ने सड़क वाले गौवंश की सेवा का संकल्प लिया।



